MIA
15 मार्च 2026 2.30 PM
नागपुर - सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को वित्तीय संकट से उबरने और अपने व्यवसाय को स्थिर बनाए रखने के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 के प्रावधानों की जानकारी और उनका समय पर उपयोग बेहद आवश्यक है। यह बात एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए) के अध्यक्ष पी. मोहन ने कही।
वे “रीइमैजिनिंग एमएसएमई सर्वाइवल-इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 के अंतर्गत इन्सॉल्वेंसी फ्रेमवर्क का रणनीतिक उपयोग” विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इस सेमिनार का आयोजन एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए), नागपुर तथा इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल एजेंसी ऑफ द इंस्टिट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईपीए-आईसीएमएआई), नई दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से एमआईए हाउस, हिंगना एमआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में किया गया।
मोहन ने कहा कि एमएसएमई देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन कई बार भुगतान में देरी, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं के कारण उद्योगों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अनेक उद्योगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि आईबीसी के तहत समयबद्ध समाधान और पुनरुद्धार के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध है।
उन्होंने कहा, “आईबीसी को केवल परिसमापन का साधन नहीं, बल्कि व्यवसाय के पुनर्गठन और पुनरुद्धार के प्रभावी ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि उद्योग समय रहते उचित जानकारी और पेशेवर मार्गदर्शन प्राप्त करें, तो वे इन प्रावधानों का रणनीतिक उपयोग कर वित्तीय संकट से बाहर निकल सकते हैं और अपने संचालन को फिर से स्थिर बना सकते हैं।”
मोहन ने एमएसएमई समुदाय को इस विषय पर जागरूक करने के लिए एमआईए के साथ सहयोग करने हेतु आईपीए-आईसीएमएआई की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम उद्योगों को वित्तीय प्रबंधन और पुनर्गठन की दिशा में बेहतर समझ प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में सीएमए मनीषा अग्रवाल ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में एमएसएमई के लिए आईबीसी के तहत उपलब्ध संरचित समाधान तंत्र की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।
सेमिनार का उद्घाटन सीए मिलिंद कानाडे ने किया। उन्होंने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार है, जिसने दिवालियापन समाधान के लिए पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया स्थापित की है।
आईपीए-आईसीएमएआई, नई दिल्ली के प्रबंध निदेशक पी. नरसिम्हन ने इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल एजेंसियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ये एजेंसियां समाधान प्रक्रिया में पारदर्शिता और पेशेवर मानकों को सुनिश्चित करती हैं।
तकनीकी सत्र में सीए अद्वैत धराप ने आईबीसी के अंतर्गत इन्सॉल्वेंसी समाधान प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। वहीं सीएमए मनीषा अग्रवाल ने विशेष रूप से एमएसएमई के लिए शुरू की गई प्री-पैकेज्ड इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (प्री-पैक) के बारे में बताया, जो वित्तीय संकट से जूझ रहे उद्योगों के लिए तेज और किफायती समाधान प्रदान करती है।
कार्यक्रम के अंत में एमआईए के मानद सचिव अरुण लांजेवार ने आभार व्यक्त किया।


























































































