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नागपुर का एमआईडीसी हिंगणा औद्योगिक क्षेत्र, जो विदर्भ के सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्रों में से एक है, आज एक गंभीर और लगातार बढ़ते अतिक्रमण संकट का सामना कर रहा है। यह संकट न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बाधित कर रहा है, बल्कि एक सुव्यवस्थित एवं योजनाबद्ध औद्योगिक क्षेत्र के रूप में इसकी विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुँचा रहा है। जिस क्षेत्र की परिकल्पना मजबूत बुनियादी ढांचे और सुव्यवस्थित योजना के साथ की गई थी, वह अब अवैध कब्जों, भीड़भाड़, प्रदूषण और कानून-व्यवस्था से जुड़ी बढ़ती समस्याओं के दबाव में जूझ रहा है।
लाजिस्टिक बाधाएं
औद्योगिक क्षेत्र के बड़े हिस्सों पर अनधिकृत संरचनाओं और गतिविधियों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। इनमें अवैध दरगाहें, कबाड़ी, सड़क किनारे ठेले-फेरी वाले, तथा मटन और चिकन की दुकानें शामिल हैं। इन अतिक्रमणों ने सार्वजनिक भूमि, आंतरिक सड़कों और यहाँ तक कि हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) के लिए आरक्षित खुले स्थानों पर भी कब्जा कर लिया है, जिससे विनिर्माण इकाइयों के संचालन में सीधा हस्तक्षेप हो रहा है। पहुंच मार्ग अक्सर अवरुद्ध रहते हैं, जिससे कच्चे माल और तैयार माल की आवाजाही में भारी देरी होती है, लॉजिस्टिक बाधाएँ पैदा होती हैं और परिचालन लागत बढ़ जाती है।
बेतरतीब पार्किंग
स्थिति को और गंभीर बना रहा है आंतरिक सड़कों पर ट्रकों, टेम्पो और निजी वाहनों की अनधिकृत एवं अव्यवस्थित पार्किंग। यह बेतरतीब पार्किंग नियमित रूप से फैक्ट्री प्रवेश द्वारों और परिवहन मार्गों को अवरुद्ध कर देती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है और उत्पादकता घटती है। उद्योगपतियों का कहना है कि जो औद्योगिक यातायात सुचारु होना चाहिए था, वह अब रोज़मर्रा की अराजकता में बदल गया है।
पर्यावरण, स्वच्छता बिगड़ी
पर्यावरण और स्वच्छता की स्थिति भी तेजी से बिगड़ी है। कबाड़ी खुले स्थानों में कचरा और मलबा जमा कर देते हैं, जबकि मांस की दुकानों द्वारा पशु अपशिष्ट का अनुचित निपटान अस्वच्छ और अस्वास्थ्यकर वातावरण पैदा कर रहा है। जमा हुआ कचरा, दुर्गंध और चूहों की बढ़ती संख्या ने औद्योगिक क्षेत्र के कुछ हिस्सों को स्वास्थ्य के लिए खतरा बना दिया है, जिसका सीधा असर उन हजारों श्रमिकों पर पड़ रहा है जो लंबे समय तक फैक्ट्रियों में काम करते हैं।
कानून व्यवस्था बनी चुनौती
बुनियादी ढांचे और स्वच्छता से परे, इन अतिक्रमणों ने गंभीर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएँ भी खड़ी कर दी हैं। औद्योगिक सदस्यों का आरोप है कि छोटे व्यापारियों की आड़ में असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए हैं, जिससे क्षेत्र असुरक्षित और अव्यवस्थित बन गया है। छेड़छाड़, छोटी-मोटी चोरी, ध्वनि प्रदूषण और डराने-धमकाने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिसके चलते उद्योगों को निजी सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। अतिक्रमणकारियों के साथ लगातार होने वाले विवाद प्रबंधन का ध्यान भटकाते हैं और कार्य वातावरण को प्रभावित करते हैं।
नए निवेश हतोत्साहित
इन सभी समस्याओं का सामूहिक प्रभाव भारी वित्तीय नुकसान, श्रमिकों के मनोबल में गिरावट और एआईडीसी हिंगणा की एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के रूप में प्रतिष्ठा को नुकसान के रूप में सामने आया है। अवरुद्ध मार्गों के कारण आपूर्ति में देरी होती है, जिससे डिलीवरी समयसीमा चूकती है और दंड भुगतना पड़ता है। खराब वातावरण और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते उत्पादकता घट रही है और श्रमिकों का पलायन बढ़ रहा है। उद्योगपतियों को आशंका है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो नए निवेश हतोत्साहित होंगे और नागपुर तथा पूरे विदर्भ क्षेत्र में रोजगार सृजन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
स्थायी अतिक्रमण विरोधी प्रकोष्ठ के गठन की मांग
हालाँकि एमआईडीसी और स्थानीय प्रशासन ने अतीत में, हाल ही में भी,अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए हैं, लेकिन इनसे केवल अस्थायी राहत ही मिल पाई है। ऐसे अभियानों में हटाए गए अतिक्रमण कुछ ही दिनों में फिर से उभर आते हैं, जो निरंतर प्रवर्तन और स्थायी निवारक तंत्र की कमी को दर्शाता है। हटाने और दोबारा कब्जे का यह चक्र औद्योगिक समुदाय की निराशा को और गहरा कर रहा है। इसीलिए उद्योग संघों ने एमआईडीसी विशेष नियोजन प्राधिकरण, स्थानीय प्रशासन और पुलिस से त्वरित एवं निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अब टुकड़ों में की गई कार्रवाइयाँ पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने एमआईडीसी हिंगणा के लिए एक स्थायी अतिक्रमण विरोधी प्रकोष्ठ(Anti-Encroachment Cell) गठित करने की मांग की है, जिसमें एमआईडीसी, स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल हों, ताकि निरंतर निगरानी, प्रवर्तन और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
डिमार्केशन जरुरी
स्वीकृत एमआईडीसी लेआउट के अनुसार सड़कों, हरित पट्टियों, खुले स्थानों और नो-वेंडिंग जोन की स्पष्ट भौतिक सीमांकन (डिमार्केशन) को एक महत्वपूर्ण पहला कदम बताया गया है। हरित पट्टियों और खुले क्षेत्रों का तत्काल विकास पौधारोपण, फेंसिंग, प्रकाश व्यवस्था और साइनबोर्ड के साथ किया जाना चाहिए, ताकि दोबारा अतिक्रमण रोका जा सके। उद्योगपतियों का कहना है कि खाली और उपेक्षित भूमि अवैध कब्जे को आमंत्रित करती है।
जीरो टोलीरेंस नीति हो लागू
एक व्यापक पार्किंग और यातायात प्रबंधन योजना भी अनिवार्य है। औद्योगिक क्षेत्र के भीतर या समीप निर्दिष्ट ट्रक पार्किंग बे, लोडिंग-अनलोडिंग ज़ोन और सख्त नो-पार्किंग कॉरिडोर विकसित किए जाने चाहिए। जुर्माना, टोइंग, सीसीटीवी निगरानी और नियमित यातायात पुलिसिंग के माध्यम से प्रवर्तन औद्योगिक यातायात को फिर से सुचारु करने के लिए आवश्यक होगा।औद्योगिक प्रतिनिधियों ने औद्योगिक क्षेत्र के भीतर अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता (Zero Tolerance) नीति लागू करने की भी मांग की है। कबाड़ व्यापार, मांस की दुकानें, सड़क किनारे फेरी-व्यवसाय और अनधिकृत धार्मिक या अर्ध-स्थायी संरचनाओं का अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र में कोई कानूनी स्थान नहीं है। साथ ही, प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि एआईडीसी सीमा के बाहर नियोजित वेंडिंग और व्यावसायिक ज़ोन के माध्यम से पुनर्वास किया जाए, ताकि अतिक्रमण केवल स्थानांतरित न हों और फिर वापस न लौट आएँ।
निगरानी कैमरे लगाए जाएं
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, स्थायी पुलिस उपस्थिति, नियमित गश्त और महत्वपूर्ण चौराहों पर निगरानी कैमरों की स्थापना आवश्यक बताई गई है, ताकि असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके और श्रमिकों व उद्यमियों का भरोसा बहाल हो। उद्योग संघों ने प्रगति की समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के बीच नियमित संयुक्त समीक्षा बैठकों का भी सुझाव दिया है।उद्योगपतियों ने जोर देकर कहा है कि एआईडीसी हिंगणा केवल एक स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि नागपुर और विदर्भ के लिए एक रणनीतिक आर्थिक संपत्ति है। प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण इसके क्षरण की अनुमति देना निवेशकों को नकारात्मक संदेश देता है और वर्षों की योजनाबद्ध औद्योगिक विकास प्रक्रिया को कमजोर करता है। उद्योग जगत ने प्रशासन के साथ पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है, लेकिन साथ ही निरंतर, स्पष्ट और स्थायी कार्रवाई पर जोर दिया है।
जैसे-जैसे हस्तक्षेप की मांग तेज़ होती जा रही है, अब जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित अधिकारियों पर है कि वे निर्णायक कदम उठाएँ। व्यवस्था बहाल करना, सार्वजनिक और हरित क्षेत्रों को अतिक्रमण से मुक्त कराना और एआईडीसी हिंगणा में नियोजन मानदंडों को सख्ती से लागू करना केवल एक प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि उद्योगों, रोजगार और नागपुर के आर्थिक भविष्य की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
केवल सख्त प्रवर्तन, सुविचारित योजना, बुनियादी ढांचे के विकास और जवाबदेही के साथ ही एमआईडीसी हिंगणा को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और कुशल औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उसका वास्तविक दर्जा वापस दिलाया जा सकता है।

























































