वस्त्र क्षेत्र के लिए तत्काल नीतिगत सुधारों की मांग

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वीआईए ने सीआईटीआई की कपास अध्ययन रिपोर्ट का किया स्वागत 

7 मई 2026                     5.30 PM
 
नागपुर - विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) द्वारा तैयार की गई हाल ही में जारी कपास अध्ययन रिपोर्ट "इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ  काॅटन सप्लाई, प्राइसिंग एंड ट्रेड पाॅलिसी इन इंडिया" का स्वागत किया है। यह रिपोर्ट घेरजी टेक्सटाइल ऑर्गनाइजेशन तथा इंटरनेशनल काॅटन एडवाइजरी कमेटी (ICAC) के सहयोग से तैयार की गई है। रिपोर्ट भारत की कपास-वस्त्र मूल्य श्रृंखला के समक्ष उपस्थित वर्तमान चुनौतियों के समाधान हेतु एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती है।

वीआईए के अध्यक्ष प्रशांत मोहोता ने कहा कि यह रिपोर्ट एक चिंताजनक वास्तविकता को सामने लाती है कि भारत में कपास की औसत उत्पादकता लगभग 450 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जो वैश्विक औसत 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से काफी कम है। यद्यपि भारत में प्रति हेक्टेयर खेती लागत मध्यम स्तर की है, लेकिन कम उत्पादकता के कारण प्रति पाउंड उत्पादन लागत अधिक हो जाती है। मोहोता ने कहा, “उत्पादकता में सुधार अब केवल कृषि का लक्ष्य नहीं रह गया है, बल्कि किसानों के लिए कपास को एक व्यवहार्य रणनीतिक फसल तथा मिलों के लिए प्रतिस्पर्धी कच्चे माल के रूप में बनाए रखने के लिए यह आर्थिक आवश्यकता बन चुका है।”

वीआईए ने विशेष रूप से रिपोर्ट की उस सिफारिश का समर्थन किया है जिसमें कपास पर आयात शुल्क हटाने की मांग की गई है। अध्ययन में कहा गया है कि वर्ष 2021-22 में महामारी के दौरान अधिशेष उत्पादन की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लगाया गया यह शुल्क अब उस समय बाधा बन गया है, जब घरेलू मांग कई बार उत्पादन से अधिक हो जाती है। मोहोता ने कहा, “एशिया के हमारे प्रतिस्पर्धी देशों को अंतरराष्ट्रीय कपास तक शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त है, जिससे भारतीय मिलें प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि रिपोर्ट के अनुसार स्थिर और पूर्वानुमान योग्य नीतिगत ढांचा मिलों को दीर्घकालिक निवेश योजना बनाने और संचालन को टिकाऊ बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की भूमिका भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के कारण खरीद बढ़ी हुई रहने की संभावना है। वीआईए ने रिपोर्ट में दिए गए निम्न प्रस्तावों का समर्थन किया है :

• बफर स्टॉक : स्थानीय मिलों को अंतरराष्ट्रीय समानता मूल्य पर लगभग 100 लाख गांठ कपास उपलब्ध कराने हेतु बफर स्टॉक की स्थापना।

• रणनीतिक भंडार : बाजार में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करने के लिए चीन की तर्ज पर तीन माह का रणनीतिक भंडार बनाए रखना।

• वित्तीय सुधार : 5% ब्याज अनुदान के साथ कॉटन प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड लागू करना तथा एमएसएमई स्पिनिंग मिलों पर तरलता का दबाव कम करने हेतु कैश क्रेडिट (CC) सीमा की अवधि 9 माह तक बढ़ाना।

इन सुधारों की आवश्यकता को पश्चिम एशिया में जारी संकट ने और अधिक गंभीर बना दिया है, जिसके कारण उर्वरक कीमतों में लगभग 40% वृद्धि हुई है तथा फरवरी 2026 से कपास और एमएमएफ की कीमतों में 15 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मोहोता ने कहा कि रिपोर्ट में सुझाए गए “ वे फॉरवर्ड ” विशेष रूप से आयात शुल्क हटाने और घरेलू कीमतों को वैश्विक रुझानों के अनुरूप लाने  को अपनाना भारत के 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्त्र निर्यात लक्ष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।वीआईए ने वस्त्र मंत्रालय तथा संबंधित वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया है कि वे भारतीय वस्त्र उद्योग के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने हेतु रिपोर्ट की सिफारिशों पर शीघ्र कार्रवाई करें।









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