महाराष्ट्र में एक सक्षम, पारदर्शी एवं व्यापारी-अनुकूल एपीएमसी व्यवस्था बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : जयकुमार रावल

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CAMIT

21 अप्रैल 2026                    7.35 PM

नागपुर - चेंबर ऑफ एसोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (CAMIT) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने, जिसका नेतृत्व इसके अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल एवं चेयरमैन मोहन गुरनानी ने किया, आज मुंबई मंत्रालय में महाराष्ट्र शासन के विपणन एवं शिष्टाचार मंत्री  जयकुमार रावल से भेंट कर एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस ज्ञापन में महाराष्ट्र भर के एपीएमसी व्यापारियों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया, विशेष रूप से नवी मुंबई एपीएमसी से संबंधित समस्याओं का उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल में व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधि जैसे भीमजी भानुशाली, ग्रेन राइस ऑइल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, प्रदीप गाला, मुकेश कुवाडिया, धुमाल एवं उत्तम शामिल थे। बैठक में वरिष्ठ अधिकारी प्रवीण दराडे, प्रशांत पाटिल एवं शरद जरे भी उपस्थित थे।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री रावल का शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। बैठक के दौरान  मोहन गुरनानी ने एपीएमसी बाजारों की संरचनात्मक व्यवस्था एवं व्यापारियों द्वारा लंबे समय से झेली जा रही समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने बताया कि नवी मुंबई सहित कई बाजारों में व्यापारियों ने अपनी दुकानों एवं गोदामों के निर्माण में 100% निवेश किया है, जबकि एपीएमसी व्यवस्था मूलतः संस्थागत वित्त की सुविधा के लिए बनाई गई थी। 

डॉ. दीपेन अग्रवाल ने यह भी बताया कि मुंबई जैसे बड़े बाजार ऐतिहासिक रूप से टर्मिनल मार्केट के रूप में कार्य करते रहे हैं, जहाँ किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं होती, फिर भी व्यापारियों पर अनेक प्रकार के कर, अत्यधिक नियामकीय नियंत्रण एवं अनुपालन का अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है, जो जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतिगत विसंगतियों, जैसे अनुचित सेस संरचना एवं अत्यधिक ट्रांसफर शुल्क के कारण व्यापार में भारी गिरावट आई है, जिससे एपीएमसी बाजारों की प्रतिस्पर्धात्मकता और समग्र कृषि व्यापार व्यवस्था प्रभावित हुई है।

भीमजी भानुशाली ने एपीएमसी सेस के तर्कसंगत पुनर्गठन, प्रक्रियाओं के सरलीकरण एवं संचालन संबंधी प्रतिबंधों में ढील देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा राज्यभर के व्यापारियों को झेलनी पड़ रही कठिनाइयों जैसे बिना समुचित सुविधाओं के मनमाने सेवा शुल्क, बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण से उत्पन्न प्रशासनिक परेशानियाँ, छोटे-मोटे मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्यों में देरी तथा व्यापार-अनुकूल वातावरण के अभाव के कारण एपीएमसी मंडियों से व्यापार के बाहर जाने की प्रवृत्ति पर भी ध्यान आकर्षित किया।

प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से ट्रांसफर शुल्क के मुद्दे को उठाया, जो मूल लीज शर्तों के अनुसार ₹10,000 से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है, जिससे लेनदेन अव्यवहारिक हो गए हैं, और इसे पुनः उचित स्तर पर लाने की मांग की। साथ ही यह भी बताया गया कि व्यापारी बाजार के रखरखाव हेतु पारदर्शी एवं उचित मेंटेनेंस शुल्क देने को तैयार हैं, बशर्ते जवाबदेही एवं सेवा सुनिश्चित हो। नवी मुंबई एपीएमसी स्थित सेंट्रल फैसिलिटी बिल्डिंग, जिसे स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा असुरक्षित घोषित किया गया है और अधिकांशतः खाली कर दिया गया है, के त्वरित पुनर्विकास की आवश्यकता को भी अत्यंत गंभीर विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया।

मंत्री जयकुमार रावल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता एवं सहानुभूति के साथ सुना और संबंधित अधिकारियों को तत्काल एवं ठोस निर्देश दिए, जिनमें 5 वर्ष की लाइसेंस नवीनीकरण नीति को मंजूरी, सेवा शुल्क से संबंधित नोटिस एवं दायित्वों के समाधान, मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्यों के लिए 7 दिनों में अनुमति न मिलने पर ‘डीम्ड परमिशन’ लागू करने तथा सेंट्रल फैसिलिटी बिल्डिंग के पुनर्विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश शामिल हैं। 

उन्होंने बताया कि बैठक में कई प्रमुख मुद्दों का समाधान कर लिया गया है तथा शेष मामलों को भी शीघ्र ही सकारात्मक रूप से हल किया जाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र में एक अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं व्यापारी-अनुकूल एपीएमसी व्यवस्था विकसित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक का समापन सकारात्मक वातावरण में हुआ, जिसमें भीमजी भानुशाली ने धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग एवं सक्रिय पहल के लिए आभार व्यक्त किया।









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