MIA
22 मई 2026 9.40 PM
नागपुर - एमआईडीसी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष पी मोहन ने सर्वोच्च न्यायालय के उस महत्वपूर्ण निर्णय का हार्दिक स्वागत किया है, जिसमें लीजहोल्ड अधिकारों के हस्तांतरण पर जीएसटी लगाने संबंधी राजस्व विभाग की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया गया है। यह निर्णय न केवल विधिक स्पष्टता प्रदान करता है, बल्कि देशभर के औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर एमआईडीसी में कार्यरत उद्योगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है।
विगत कई वर्षों से लीजहोल्ड अधिकारों के हस्तांतरण पर जीएसटी की देनदारी को लेकर उद्योगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इस कारण अनेक इकाईयों को अनावश्यक नोटिस, कर विवाद और वित्तीय अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा था। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ऐसे लेन-देन को ‘सप्लाई’ के रूप में नहीं, बल्कि अचल संपत्ति के हस्तांतरण के रूप में देखा जाएगा, जिससे जीएसटी लागू नहीं होगा। यह व्याख्या उद्योगों के लिए अत्यंत राहतकारी है और अनुपालन के बोझ को भी कम करेगी।
यह निर्णय ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और औद्योगिक परिसंपत्तियों के पुनर्गठन, हस्तांतरण तथा बेहतर उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। एमआईडीसी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयाँ विभिन्न कारणों से निष्क्रिय पड़ी हैं; ऐसे में यह निर्णय उनके पुनर्जीवन और नए निवेश को आकर्षित करने में सहायक सिद्ध होगा।
पी. मोहन ने आशा जताई है कि, यह निर्णय सरकार और नीति-निर्माताओं को और अधिक उद्योग-अनुकूल सुधार लागू करने के लिए प्रेरित करेगा। यह एक सकारात्मक संकेत है कि न्यायपालिका उद्योगों के व्यावहारिक मुद्दों को समझते हुए संतुलित और दूरदर्शी निर्णय दे रही है।


























































































