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18 मई 2026 6.15 PM
नागपुर - एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, हिंगना ने डायरेक्टरेट ऑफ इंडस्ट्रीज, नागपुर क्षेत्र तथा डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी), भारत सरकार के सहयोग से वर्ल्ड बैंक के बी-रेडी असेसमेंट (पिलर-III: फर्म लेवल सर्वे) पर आधारित एक कार्यशाला का सफल आयोजन एमआईए हॉल में किया। यह पहल वर्ल्ड बैंक के संशोधित ढांचे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत करना है।
डीपीआईआईटी,जो भारत सरकार के अंतर्गत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुगम बनाने हेतु नोडल विभाग है, देशभर में बी-रेडी असेसमेंट प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहा है। यह विभाग राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर फर्म-स्तरीय डेटा एकत्रित करने, नियामकीय बाधाओं की पहचान करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाने का कार्य करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मंचासीन अतिथियों के स्वागत से हुई। वर्ल्ड बैंक समूह के प्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों तथा एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सदस्यों का हार्दिक स्वागत किया गया। डॉ. जीविशा जोशी, उप सचिव, डीपीआईआईटी ने बिजनेस -रेडी फ्रेमवर्क का परिचय देते हुए इसके प्रमुख उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, जिनमें उद्योग-स्तरीय सर्वेक्षण, क्षेत्र-विशिष्ट व्यावसायिक परिस्थितियों की समझ तथा वर्ल्ड बैंक की मूल्यांकन पद्धति एवं प्रश्नावली के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है।
एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. मोहन ने एसोसिएशन की भूमिका एवं औद्योगिक हितों के प्रतिनिधित्व तथा नीति संवाद को सुगम बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने उद्योग एवं शासन के बीच सतत संवाद सुनिश्चित करने के लिए ऐसी कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ किया जा सके।
संयुक्त संचालक उद्योग, शिवकुमार एस. मुददमवार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में नीतिगत सुधारों के समर्थन हेतु उद्योगों की सक्रिय भागीदारी के महत्व पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात अभिषेक त्रिपाठी, संयुक्त आयुक्त आयकर; कात्यायनी भाटिया, उप आयुक्त; जमीरुद्दीन अंसारी, निदेशक पीएमयू ; तथा यश पनिकर,डीडीजी, बीएसएनएल ने औद्योगिक विकास एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर अपने विचार व्यक्त किए।
यूटिलिटी सर्विसेज एवं टैक्सेशन पर केंद्रित सत्रों में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की। सदस्यों ने उच्च विद्युत दरों, सौर ऊर्जा उपयोग से संबंधित अतिरिक्त शुल्क, बार-बार होने वाले नियामकीय निरीक्षण तथा बढ़ती साइबर सुरक्षा चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।कार्यशाला के दौरान प्राप्त मूल्यवान सुझाव एवं व्यावहारिक फीडबैक डीपीआईआईटी को लक्षित सुधारों को आगे बढ़ाने तथा अधिक पारदर्शी, कुशल एवं उद्योग-अनुकूल व्यावसायिक वातावरण के निर्माण में सहायक होंगे।


























































































