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11 जून 2026 5.10 PM
नागपुर - आत्मनिर्भर और स्वावलंबी भारत बनाने हेतु विभिन्न प्रयासों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण है ऊर्जा संरक्षण करना। आज जरूरत है कि हम ऊर्जा की ज्यादा से ज्यादा बचत करें, हम जो अनावश्यक ऊर्जा की खपत करते हैं उसे नियंत्रित कर ऊर्जा की बचत ऊर्जा का उत्पादन करने के बराबर है। ऐसा स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया ने कहा। वे ऊर्जा संरक्षण अभियान के अंतर्गत आयोजित ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा बचत जन जागरण कार्यक्रम में आम जनता को संबोधित कर रहे थे।
भरतिया ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज में ऊर्जा संरक्षण के प्रति रुकता बढ़ाना और व्यावहारिक सुझाव के मध्यम से ऊर्जा बचत को जान आंदोलन स्वरूप प्रदान करना है। बालकृष्ण भरतिया ने अपने संबोधन में कहा कि ऊर्जा संरक्षण आज केवल एक आवश्यकता नहीं बल्कि राष्ट्रीय निर्माण एवं सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ऊर्जा आत्म निर्भरता एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु समाज के प्रत्येक नागरिक को सक्रिय भागीदारी प्रदान करने की आवश्यकता है।
इस चिंतन मंथन बैठक में परिचर्चा के दौरान उपस्थित सदस्यों ने ऊर्जा संरक्षण के विभिन्न पहलू पर अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए। उषा हिंदू ने कहा कि ऊर्जा बचत की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए तथा बच्चों को बचपन से ही ऊर्जा संरक्षण के संस्कार दिए जाने चाहिए। विजय चौरसिया ने सौर ऊर्जा सोलर एनर्जी के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के सुझाव दिए। गोविंद पटेल ने सुझाव दिया कि विद्यालय स्तर पर ऊर्जा संरक्षण संबंधित शिक्षा एवं जागरुकता कार्यक्रम के आयोजन पर बल देना चाहिए। वैश्य समाज के अश्विनी गुप्ता को इस विषय गंभीर बताते हुए कहा कि बिजली उत्पादन के प्रकृति संसाधन का उपयोग वक्त की जरूरत है। तंत्र ज्ञान और संसाधन सस्ते हो रहे हैं इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों ने प्रधानमंत्री द्वारा दी जा रही रियायतों का लाभ ले कर अपने छतों पर सौर ऊर्जा की व्यवस्था करनी चाहिए।
कैलाश छाबड़िया ने अनावश्यक विधुत उपकर्ण के उपयोग को कम करने की आवश्यकता बताई।विनोद गुप्ता ने पारंपरिक बल्ब के स्थान पर ऊर्जा कुशल एलईडी प्रकाश व्यवस्था पर जोर दिया। केशव श्रीवासन ने प्रकृति प्रकाश एवं प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। किशोर धाराशिवकर ने जिम्मेदारीपूर्ण एवं आवश्यकता अनुसार ऊर्जा उपयोग को समय की माँग बताया। सुनीता श्रीवासन ने घरेलू एवं व्यावसायिक स्तर पर बिजली की बचत को जीवनशैली के हिस्सा बनाने का आग्रह किया। आरती बादल ने एयर कंडीशनर एवं अन्य अधिक ऊर्जा खपत करने वाले उपकरणों के सीमित एवं विवेक पूर्ण उपयोग पर बल दिया। राम अवतार अग्रवाल ने दुकानों और कारखानों में बिजली खपत नियंत्रित करने का सुझाव दिया। अनिता रामप्रसाद ने अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकर्ण के उपयोग में कमी लाने की आवश्यकता व्यक्त की। संयोजिका पूजा झाम ने प्राकृतिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग तथा व्यापक वृक्षारोपण को ऊर्जा संरक्षण से छोड़ते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
चिंतन मंथन की समाप्ति पर उपस्थित सभी लोगों ने इस अभियान को जन जागरण तक पहुँचने के लिए विचारों और सुझाव प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें आवाह्न करना चाहिए कि आवश्यकता होने पर विद्युत इस्तेमाल पूरी तरह से जरूरत अनुरूप इस्तेमाल किया जाए। घर में झाड़ू पोछा करते समय सारे पंखे चालू रहते हैं। रिमोट से चलने वाले उपकारणों के स्विच चालू रहते हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखना और रोकना जरूरी है। सभा के अंत में उपस्थित सदस्यों के प्रति अति बादल ने आभार व्यक्त किया।



















