एपीएमसी व्यापारियों ने महाराष्ट्र सरकार को 2 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया : मार्केट सेस समाप्त करें

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मांग पूरी न होने पर 2 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र में शांतिपूर्ण असहयोग आंदोलन की चेतावनी

5 अगस्त 2026      6.15 PM

नागपुर - हाल के वर्षों में कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) से जुड़े व्यापारियों की सबसे बड़ी राज्यव्यापी बैठकों में से एक में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से आए प्रमुख व्यापार एवं उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि 2 अक्टूबर 2026 तक एपीएमसी मार्केट सेस समाप्त नहीं किया गया, तो गांधी जयंती से पूरे महाराष्ट्र में व्यापारी शांतिपूर्ण राज्यव्यापी असहयोग आंदोलन प्रारंभ करेंगे तथा मार्केट सेस की न तो वसूली करेंगे और न ही उसका भुगतान करेंगे।

यह ऐतिहासिक प्रस्ताव कोल्हापुर में कोल्हापुर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज तथा कोल्हापुर ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राज्यव्यापी एपीएमसी व्यापारी सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित किया गया।

सम्मेलन में चैंबर ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (CAMIT) के अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने इस लंबे समय से लंबित मुद्दे के समाधान हेतु एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए व्यापारियों से एकजुटता, सकारात्मक संवाद तथा आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक एवं निर्णायक आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डॉ. दीपेन अग्रवाल ने कहा कि CAMIT ने निरंतर राज्य सरकार के समक्ष व्यापारियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से रखा है तथा हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जीएसटी के साथ-साथ जारी एपीएमसी मार्केट सेस के कारण व्यापारियों पर पड़ रहे गंभीर आर्थिक बोझ से अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है कि इस विषय पर सकारात्मक एवं गंभीर विचार किया जाएगा।

व्यापारियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि तत्काल आंदोलन का मार्ग अपनाने के बजाय सरकार को इस विषय के समाधान के लिए दो माह का समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आइए हम अपनी एकता, धैर्य और सामूहिक शक्ति का परिचय दें। हमने इस गंभीर विषय को  मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है और उन्होंने सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया है। इसलिए सरकार को 2 अक्टूबर तक का समय देना चाहिए। किंतु यदि तब तक कोई ठोस निर्णय नहीं होता, तो महाराष्ट्र का संपूर्ण एपीएमसी व्यापारी वर्ग एकजुट होकर शांतिपूर्ण किंतु निर्णायक राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।”

डॉ. अग्रवाल ने राज्य की सभी एपीएमसी व्यापारी संस्थाओं से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों एवं विधायकों को ज्ञापन देकर मार्केट सेस समाप्त करने के समर्थन में व्यापक राजनीतिक सहमति तैयार करें।

स्थानीय निकाय कर (LBT) के विरुद्ध सफल आंदोलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोल्हापुर ऐतिहासिक एलबीटी आंदोलन का केंद्र बना था, उसी प्रकार एपीएमसी मार्केट सेस समाप्ति का आंदोलन भी कोल्हापुर से ही सफलता प्राप्त करेगा, क्योंकि यह संघर्ष अनुशासित नेतृत्व, सामूहिक संकल्प और रचनात्मक संवाद पर आधारित है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल व्यापारियों के हित में नहीं बल्कि उपभोक्ताओं तथा महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था के व्यापक हित में भी है, क्योंकि बहुस्तरीय कर व्यवस्था समाप्त होने से व्यापार की लागत कम होगी और बाजार व्यवस्था अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगी।

इस अवसर पर CAMIT के चेयरमैन मोहन गुरनानी ने सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी समितियों को आटा, सूजी, खाद्य तेल, दालें एवं ड्राई फ्रूट जैसे विनियमन-मुक्त (Deregulated) उत्पादों पर भी यूजर चार्ज लगाने का अधिकार दिए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में व्यापारी जीएसटी, एपीएमसी मार्केट सेस और यूजर चार्ज,तीनों का बोझ झेल रहे हैं, जो बहुस्तरीय कराधान का अन्यायपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने मंडी समितियों द्वारा अधिसूचित मंडी क्षेत्र के बाहर चेकपोस्ट स्थापित कर निरीक्षण किए जाने का भी विरोध किया और कहा कि जब तक मंडी क्षेत्र के भीतर और बाहर दोनों स्थानों से सेस समाप्त नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

महाराष्ट्र चेंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रविंद्र माणगावे ने कोल्हापुर सम्मेलन को राज्यव्यापी अभियान का पहला महत्वपूर्ण चरण बताया। उन्होंने घोषणा की कि 2 अक्टूबर से पूर्व नाशिक और मुंबई में भी राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही 9 अगस्त (क्रांति दिवस) से सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर मुंबई के आज़ाद मैदान में विशाल प्रदर्शन तथा आमरण अनशन भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करते समय खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं को कर के दायरे से बाहर रखने का आश्वासन दिया गया था, किंतु जुलाई 2022 के बाद विभिन्न नीतिगत परिवर्तनों के कारण अनेक आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगाया गया, जबकि मार्केट सेस एवं अन्य शुल्क भी जारी हैं, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अनुचित आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इससे पूर्व कोल्हापुर चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय शेटे ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मार्केट सेस के व्यापार पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया तथा विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र के व्यापारियों की एकजुट आवाज सरकार को निर्णय लेने के लिए बाध्य करेगी।

दि ग्रेन, राइस एंड ऑयल सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन, मुंबई के अध्यक्ष भीमजी भानुशाली ने 5 दिसंबर 2025 के सफल महाराष्ट्र बंद तथा उसके बाद राज्य के विपणन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक सकारात्मक आश्वासनों के बावजूद अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसलिए अब व्यापक आंदोलन अपरिहार्य हो गया है।

दि पूना मर्चेंट्स चेंबर के अध्यक्ष राजेंद्र बाठिया ने मंडी समितियों को अपनी इच्छानुसार यूजर चार्ज लगाने का अधिकार देने के प्रस्ताव का विरोध किया तथा व्यापारियों को पूर्व प्रभाव से जारी नोटिसों को मनमाना और अन्यायपूर्ण बताया।

CAMIT के मानद सचिव  अजीत कोठारी ने बताया कि कोल्हापुर सम्मेलन महाराष्ट्र भर के व्यापारिक संगठनों के साथ कई महीनों तक चली विस्तृत चर्चा एवं परामर्श का परिणाम है। जिला स्तर पर आयोजित सम्मेलनों ने व्यापारियों में अभूतपूर्व एकजुटता पैदा की है और आज का सम्मेलन इस आंदोलन का महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।

नाशिक ग्रेन एंड ग्रॉसरी होलसेल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रफुल्ल संचेती ने घोषणा की कि आंदोलन के दूसरे चरण के अंतर्गत अगला राज्यव्यापी व्यापारी सम्मेलन नाशिक में आयोजित किया जाएगा।

सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, अहिल्यानगर, जलगांव, बारामती, लातूर, ठाणे, सांगली, नागपुर सहित राज्य के अनेक जिलों के व्यापारिक नेताओं ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए एपीएमसी मार्केट सेस की तत्काल समाप्ति तथा यूजर चार्ज वापस लेने की मांग का समर्थन किया।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जीएसटी, एपीएमसी मार्केट सेस तथा प्रस्तावित यूजर चार्ज का एक साथ लागू होना बहुस्तरीय कराधान का अन्यायपूर्ण स्वरूप है, जिससे व्यापार की लागत बढ़ती है और अंततः उसका बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

सम्मेलन में यह भी कहा गया कि सरकार के साथ कई दौर की बैठकों, अनेक आश्वासनों तथा कुछ परिपत्रों पर अस्थायी रोक के बावजूद अभी तक कोई अंतिम नीति-निर्णय नहीं हुआ है, जिससे महाराष्ट्र के एपीएमसी व्यापारियों में व्यापक असंतोष व्याप्त है।

सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित प्रमुख प्रस्ताव

• महाराष्ट्र स्तर पर मार्केट सेस उन्मूलन संघर्ष समिति का गठन किया जाए।

• यदि 2 अक्टूबर 2026 तक मार्केट सेस समाप्त नहीं किया गया तो व्यापारी मार्केट सेस की वसूली और भुगतान दोनों बंद कर देंगे। यदि प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई की गई तो महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया जाएगा।

• राज्य सरकार को खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी से राजस्व प्राप्त हो रहा है, इसलिए एपीएमसी मार्केट सेस तत्काल समाप्त किया जाए।

• आवश्यकता होने पर मंडी समितियों को सेस के स्थान पर सरकारी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।

• मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ शीघ्र बैठक आयोजित कर मार्केट सेस समाप्त करने तथा एपीएमसी सुधारों को गति दी जाए।

• एपीएमसी अधिनियम तथा प्रस्तावित राष्ट्रीय मार्केट कमेटी ढांचे में संशोधन से पूर्व व्यापारिक संगठनों से औपचारिक परामर्श किया जाए।

• पूर्व आश्वासन के अनुसार एपीएमसी व्यापार लाइसेंस की पूर्ण ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जाए; अन्यथा व्यापारी अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करेंगे।

• मंडी समितियों को यूजर चार्ज लगाने एवं वसूलने का अधिकार तत्काल वापस लिया जाए।

सम्मेलन में अजीत कोठारी को मार्केट सेस उन्मूलन संघर्ष समिति का संयोजक नियुक्त किया गया, जो राज्यव्यापी आंदोलन का समन्वय करेंगे।

अखिल ग्राहक पंचायत ने भी इस आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि बहुस्तरीय कर व्यवस्था का अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

सम्मेलन में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से प्रमुख व्यापारिक संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिसने राज्य के व्यापारिक समुदाय की अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया। सम्मेलन का समापन इस दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान का पूरा अवसर दिया जाएगा, किंतु यदि 2 अक्टूबर 2026 तक एपीएमसी मार्केट सेस समाप्त नहीं किया गया तो व्यापारी समुदाय पूरे महाराष्ट्र में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं निर्णायक राज्यव्यापी आंदोलन प्रारंभ करेगा।

कार्यक्रम का संचालन विवेक शेटे ने किया, जबकि श्री वैभव सावर्डेकर ने आभार व्यक्त किया।









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