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नए आयकर एक्ट की जानकारी हेतु विभाग की 'कर सेतु' बुकलेट का व्यापारी लें लाभ
12 मई 2026 10.00 AM
नागपुर - नाग विदर्भ चेंबर ऑफ काॅमर्स द्वारा गणेशपेठ स्थित होटल द्वारकामाई में आयोजित कार्यकारिणी सभा में नए आयकर एक्ट 2025 के प्रावधानों पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रमोद निकालजे निदेशक, आयकर एवं मुख्य वक्ता वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेट सीए महेन्द्र जैन ने सदस्यों का मार्गदर्शन किया।
आयकर निदेशक प्रमोद निकालजे ने कहा कि व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली ऐसी संस्था में उन्हें करदाताओं का मार्गदर्शन करने हेतु आमंत्रित किया तद्हेतु चेंबर का धन्यवाद। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि व्यापारी वर्ग ज्यादा से ज्यादा टैक्स भुगतान करना चाहता है किंतु प्रावधानों की जटिलता के कारण ऐसा नहीं कर पाता। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर आयकर विभाग ने प्रावधानों की जटिलताओं का सरलीकरण करते हुये आयकर एक्ट 2025 लागू किया है।
इस नए एक्ट में शब्दों की संख्या आधी कर दी गई है। टीडीएस के लिए सिर्फ अब असेसमेंट ईयर लागू कर दिया है। साथ ही टीडीएस व टीसीएस की एक-एक धाराएं रहेगी। नया एक्ट तकनीकी आधारित, डिजिटल, पारदर्शी और टैक्स पेयर्स फ्रेंडली है। उन्होंने सभी करदातों से निवेदन किया कि वे अपने आयकर रिटर्न में सभी छोटे-बड़े ट्रांजेक्शन के साथ सभी नगद ट्रांजेक्शन की जानकारी दें, क्योंकि आयकर विभाग आयकर रिटर्न के अलावा करदाता के इन्वेस्टमेंट, संपत्ति खरीद-बिक्री, महंगी गाड़ियों की खरीदी आदि माध्यमों से भी करदाता की जानकारी जुटाता है।
साथ ही उन्होंने सदस्यों से कहा कि यदि विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का नोटिस भेजा जाता है तो उसका गंभीरता से जबाव दें। नोटिसों को अनदेखा करने या संतोषजनक सही जवाब न देने पर विभाग द्वारा गंभीर कार्रवाई के प्रावधान भी हैं। व्यापारी व आयकर विभाग सिक्के के दो पहलू हैं। व्यापारी वर्ग आय निर्माण के साथ-साथ रोजगार भी पैदा करता है। विभाग की सदैव इच्छा है कि करों के अनुपालन में व्यापारियों को कोई परेशानी न हो, इसी तरह करदाता ने भी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ करों का अनुपालन करना चाहिए। विभाग सदैव व्यापारी की सहायता के उपलब्ध है और आगे भी इसी तरह व्यापारियों के बीच आकर विभाग द्वारा उनका मार्गदर्शन किया जाता रहेगा। साथ ही यदि व्यापारियों को प्रावधानों की संरचना को लेकर कोई समस्या हो तो उसका प्रतिवेदन विभाग को दें। वे व्यापारियों के प्रतिवेदनों को वित्त मंत्रालय तक अवश्य पहुचायेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए महेन्द्र जैन ने सदस्यों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि नया आयकर एक्ट लागू होने से पुराना आयकर एक्ट 1961 पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। मार्च 2026 के पहले के मामलों पर कार्यवाही पुराने एक्ट के अनुसार ही होगी। नया एक्ट 90% पुराने एक्ट की तरह ही है सिर्फ शब्दों की संरचना, सेक्शन नंबर, कोड आदि बदलाव कर शब्दों को कम किया गया है मुख्य प्रावधान पुराने एक्ट जैसे ही हैं। विरोधाभास हर एक्ट में होता है। करदाता एक्ट को कैसे देखता है यह करदाता पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि इस नए एक्ट में टीडीएस को लेकर कुछ महत्वूपर्ण बदलाव किए गए हैं। जैसे अब एक ही चालान मल्टीहेड के चालान भरे जा सकते हैं। पार्टनरशिप फर्मो के लिए टीडीएस नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। इस एक्ट में मध्यम व छोटे करदाताओं के लिए सख्त प्रावधान किया गया है। यदि 30 सितम्बर तक ऑडिट नहीं होता है तो पहले दिन से ही रू. 75000/- पेनाल्टी लगेगी और यदि 31 अक्टूबर तक भी ऑडिट नहीं होता है तो यह पेनाल्टी दोगुना यानी रू. 1.5 लाख हो जाएगी। पहले पेनाल्टी लगने पर करदाता अपील में जा सकते थे और इसके बाद पेनाल्टी माफ हो जाती थी किंतु नए कानून में पेनाल्टी को फीस में बदल दिया गया है अर्थात करदाताओं द्वारा इसका भुगतान करना आवश्यक होगा।
सीए महेन्द्र जैन ने सभी करदाताओं से निवेदन किया कि सभी अपने मोबाइल नं. व ई-मेल विभाग के पास अपडेट करवा लें ताकि विभाग द्वारा भेजी कोई सूचना या नोटिस की जानकारी उनको मिलती रहे, क्योंकि कई मामलों में नोटिसों का जवाब न देने पर शत प्रतिशत पेनाल्टी का भी प्रावधान है। आयकर विभाग ने नए एक्ट की जानकारी देने के लिए “कर सेतु” बुकलेट निकाला है, जिसका व्यापारी वर्ग अवश्य लाभ लें। प्रमोद निकालजे एवं सीए महेन्द्र जैन ने सदस्यों के सभी सवालों का सरलता से आसान भाषा में जवाब दिया।
कार्यक्रम का संचालन चेंबर के उपाध्यक्ष कार्यक्रम संयोजक सीए अश्विनी अग्रवाल ने किया तथा आभार प्रदर्शन सहसचिव दीपक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर प्रमुखता से अध्यक्ष फारूक अकबानी, पूर्व अध्यक्ष श्रीगोपाल सोनी, हेमंत खुंगर, जगदीश बंग, अश्विन प्रकाश मेहाड़िया (अग्रवाल), उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर, सीए अश्विनी अग्रवाल, उमेश पटेल, सचिव सीए हेमंत सारडा, सहसचिव दीपक अग्रवाल, अशोक संघवी, मनीष जेजानी, बड़ी संख्या में कार्यकारिणी सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य, व्यापार संगठनों के अध्यक्ष,
सचिव,प्रतिनिधि सदस्य उपस्थित थे।


























































































