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15 मई 2026 3.00 PM
नागपुर - हाल ही में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में लगभग ₹3 प्रति लीटर तथा सीएनजी की कीमतों में लगभग ₹2 प्रति लीटर की वृद्धि उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। यह प्रतिक्रिया देते हुए एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पी. मोहन ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों का औद्योगिक क्षेत्र पर व्यापक और दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। मोहन ने कहा कि ईंधन कीमतों में यह वृद्धि भले ही मामूली दिखाई दे, लेकिन इसका औद्योगिक संचालन, लॉजिस्टिक्स, परिवहन तथा कुल उत्पादन लागत पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, भुगतान में देरी, बढ़ते वित्तीय दबाव, ऊंची ब्याज दरों तथा बाजार की अनिश्चितताओं जैसी अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे समय में ईंधन कीमतों में यह नई वृद्धि छोटे एवं मध्यम उद्योगों की कार्यशील पूंजी और लाभप्रदता पर अतिरिक्त दबाव डालेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान ईंधन मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव तथा विभिन्न देशों में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियां हैं, जिनके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं। इसके अतिरिक्त, तेल विपणन कंपनियां अंडर-रिकवरी और परिचालन घाटे के कारण वित्तीय दबाव में हैं, जिसके चलते उन्हें ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।
मोहन ने यह भी कहा कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए कच्चे तेल का आयात और अधिक महंगा हो गया है, जबकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डीजल आज भी भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की रीढ़ बना हुआ है। अधिकांश औद्योगिक परिवहन प्रणाली, मालवाहक वाहन एवं व्यावसायिक वाहन डीजल पर निर्भर हैं। ईंधन कीमतों में वृद्धि से विनिर्माण, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, केमिकल, फूड प्रोसेसिंग तथा पैकेजिंग उद्योगों की परिवहन एवं माल ढुलाई लागत तुरंत बढ़ जाएगी। विशेष रूप से एमआईडीसी क्षेत्रों में स्थित उद्योग दैनिक रूप से कच्चे माल और तैयार उत्पादों के आवागमन पर निर्भर रहते हैं, जिससे अतिरिक्त परिवहन लागत सीधे उत्पादन लागत में वृद्धि करेगी।
उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों ने स्वच्छ और किफायती विकल्प के रूप में सीएनजी आधारित वाहनों को अपनाया था, वे अब सीएनजी कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण अपनी लागत संबंधी बढ़त खो रहे हैं। उनके अनुसार ईंधन कीमतों में वृद्धि का प्रभाव पूरे औद्योगिक तंत्र पर पड़ता है, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने से कच्चे माल, पैकेजिंग, मेंटेनेंस सेवाओं और अन्य परिचालन गतिविधियों की लागत भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होता है क्योंकि ये उद्योग बहुत कम लाभ मार्जिन पर काम करते हैं और कड़ी बाजार प्रतिस्पर्धा के कारण बढ़ी हुई लागत का भार ग्राहकों पर नहीं डाल पाते। बड़े उद्योगों को आपूर्ति करने वाली अनेक सहायक इकाइयों को बढ़ती लागत के बावजूद पुराने दामों पर आपूर्ति जारी रखनी पड़ती है, जिससे उनकी लाभप्रदता और टिकाऊपन प्रभावित होता है। मोहन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतें महंगाई को भी बढ़ावा देती हैं, जिसका असर अंततः उपभोक्ता मांग और औद्योगिक उत्पादन पर पड़ता है। बाजार में मांग में कमी और बढ़ते परिचालन खर्चों के कारण एमएसएमई क्षेत्र में विस्तार योजनाएं, निवेश और रोजगार सृजन प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार से अपील करते हुए पी. मोहन ने कहा कि ईंधन पर लगने वाले करों का युक्तिकरण किया जाना चाहिए तथा उद्योगों एवं एमएसएमई के लिए सहायक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि विशेष लॉजिस्टिक्स सहायता, बेहतर औद्योगिक आधारभूत संरचना, किफायती वैकल्पिक ऊर्जा समाधान तथा एमएसएमई के लिए लचीली वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उद्योग बढ़ती लागत के दबाव का सामना कर सकें।उन्होंने कहा कि एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और रोजगार सृजन, विनिर्माण वृद्धि तथा निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में ईंधन कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और उद्योगों को सहयोग देना औद्योगिक विकास तथा आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।


























































































